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Class 10th Science Subjective Question

Class 10th ऊर्जा के स्रोत (दीर्घ उत्तरीय प्रश्न उत्तर) || Urja Ke Srot Subjective class 10th science Subjective question pdf

दोस्तों यहां पर क्लास 10th साइंस का क्वेश्चन आंसर (Class 10th Science Objective & Subjective Question Answer) दिया गया है तथा यहां पर क्लास 10th साइंस का मॉडल पेपर (Class 10th Science Model Paper 2023) तथा ऑनलाइन टेस्ट (Class 10th Science Online Test) भी दिया गया है वैसे विद्यार्थी जो मैट्रिक परीक्षा 2023 की तैयारी कर रहे हैं तो इस पेज में आपको क्लास 10th साइंस का सब्जेक्टिव ऊर्जा के स्रोत का दीर्घ उत्तरीय प्रश्न उत्तर ( Urja Ke Srot Subjective Question Answer ) यहां पर दिया गया है तथा अगर आप लोग ऊर्जा के स्रोत का ऑब्जेक्टिव क्वेश्चन आंसर पढ़ना चाहते हैं तो लिंक पर क्लिक करके पढ़ सकते हैं

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भौतिकी विज्ञान ऊर्जा के स्रोत सब्जेक्टिव क्वेश्चन आंसर 2023

ऊर्जा के स्रोत ( 5 अंक स्तरीय प्रश्न )

Q1. सौर कुकर का उपयोग करने के क्या लाभ तथा हानियाँ हैं ? क्या ऐसे भी क्षेत्र हैं जहाँ सौर कुकरों की सीमित उपयोगिता है।

उत्तर ⇒ सौर कुकर का उपयोग करने के लाभ –

I. सौर कुकर के उपयोग से पर्यावरण प्रदूषण नहीं होता।
II. सौर कुकर में एक समय में चार खाद्य पदार्थ पकाए जा सकते हैं।
III. सौर कुकर के उपयोग से ईधन की बचत होती है।

सौर कुकर की सीमाएँ या हानियां –

I. सौर कुकर द्वारा रात के समय भोजन नहीं पकाया जा सकता।
II. खराब मौसम में सौर कुकर में भोजन नहीं पकाया जा सकता।
III. बॉक्सनुमा सौर कुकर में हम रोटियाँ (चपातियाँ) नहीं बना सकते।
हाँ, ऐसे भी जगह हैं जहाँ सौर कुकर की सीमित उपयोगिता है क्योंकि यहाँ पर सौर ऊर्जा की उपलब्धता दुर्लभ होती है।


Q2. ऊर्जा की बढ़ती मांग के पर्यावरणीय परिणाम क्या है ? ऊर्जा की खपत को कम करने के उपाय लिखिए।

उत्तर ⇒ ऊर्जा की मांग तो जनसंख्या वृद्धि के साथ निरंतर बढ़ती ही जाएगी। ऊर्जा किसी भी प्रकार की हो उसका पर्यावरण पर प्रभाव निश्चित रूप से पड़ेगा। ऊर्जा की खपत कम नहीं हो सकती। उद्योग-धंधे, वाहन, दैनिक आवश्यकताएँ आदि सब के लिए ऊर्जा की आवश्यकता तो रहेगी। यह भिन्न बात है कि वह प्रदूषण फैलाएगा या पर्यावरण में परिवर्तन उत्पन्न करेगा।
ऊर्जा की बढ़ती मांग के कारण जीवाश्म ईधन पृथ्वी की परतों के नीचे समाप्त होने के कगार पर पहुंच गया है। लगभग 200 वर्ष के बाद यह पूरी तरह समाप्त हो जाने की संभावना है। जल विद्युत ऊर्जा के लिए बड़े-बड़े बांध बनाए गए हैं जिस कारण पर्यावरण पर गहरा प्रभाव पड़ा है। ऊर्जा के विभिन्न नए स्रोत खोजते समय ध्यान रखा जाना चाहिए कि उस ईधन की कैलोरीमान अधिक हो। उसे प्राप्त करना सरल हो और उसका दाम बहुत अधिक न हो। स्रोत का पर्यावरण पर कुप्रभाव नहीं पड़ना चाहिए।


Q3. ऊर्जा स्रोतों का वर्गीकरण निम्नलिखित वर्गों में किस आधार पर करेंगेः
I. नवीकरणीय तथा अनवीकरणीय
II. समाप्य तथा अक्षय
III. क्या I तथा II के विकल्प समान हैं ?

उत्तर ⇒ I. नवीकरणीय तथा अनवीकरणीय ऊर्जा के स्रोत :
जल ऊर्जा, पवन ऊर्जा, सौर ऊर्जा आदि ऊर्जा के वे स्रोत हैं जो बार-बार उपयोग किए जा सकते हैं, उन्हें नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत कहते हैं। परन्तु वे ऊर्जा स्रोत जिनके भण्डार सीमित हैं और जिनके पुनर्स्थापन में लाखों वर्ष लगते हैं उन्हें अनवीकणीय ऊर्जा स्रोत कहते हैं। जैसे- कोयला और पेट्रोलियम।

II. समाप्य तथा अक्षय ऊर्जा स्रोत : ऊर्जा के नवीकरणीय स्रोत जैसे पवन, जल और सौर ऊर्जा का उपयोग बार-बार और लम्बे समय तक किया जा सकता है। अतः ये असमाप्य ऊर्जा स्रोत कहलाते हैं। अनवीकरणीय स्रोत की पुनर्स्थापना में लाखों वर्ष लगते हैं। अत: इसे समाप्य ऊर्जा स्रोत कहा जा सकता है।

III. उपर्युक्त तथ्य के आधार पर हम कह सकते हैं कि I और II के विकल्प समान हैं।


Bihar Board Class 10th Urja Ke Srot Subjective Question Answer

Q4. निम्नलिखित से ऊर्जा निष्कर्षित करने की सीमाएँ लिखिए –
I. पवनें
II. तरंगें
III, ज्वार-भाटा

उत्तर ⇒ ऊर्जा निष्कर्षित करने की सीमाएँ निम्नलिखित है –
I. पवनें : पवन ऊर्जा फॉर्म सिर्फ उन्हीं क्षेत्रों में लगाए जा सकते हैं जहाँ वर्ष के अधिकांश दिनों में तीव्र पवनें चलती हों। टरबाइनों की.जरूरी गति को बनाए रखने के लिए पवनों की चाल भी 15 km/h से अधिक होनी चाहिए।

II. तरंगे : तरंग ऊर्जा का सिर्फ वहीं पर व्यावहारिक उपयोग हो सकता है जहाँ तरंगें बहुत प्रबल हों।

III. ज्वार-भाटा : ज्वारीय ऊर्जा का दोहन हम सागर के किसी संकीर्ण क्षेत्र पर बाँध का निर्माण करके कर सकते हैं। ऐसे बाँध सिर्फ सीमित स्थानों पर ही बनाए जा सकते हैं।


Q5. महासागरों से प्राप्त हो सकने वाली ऊर्जाओं की क्या सीमाएँ हैं।

उत्तर ⇒ महासागरों से तीन प्रकार की ऊर्जा प्राप्त होती है –

ज्वारीय ऊर्जा : घूर्णन गति करती पृथ्वी पर मुख्य रूप से चन्द्रमा के गुरूत्वीय खिंचाव के कारण सागरों में जल का स्तर चढ़ता व गिरता रहता है। इस परिघटना को ज्वार-भाटा कहते हैं। ज्वार-भाटे में जल के स्तर के चढ़ने तथा गिरने से हमें ज्वारीय ऊर्जा प्राप्त होती है। ज्वारीय ऊर्जा का दोहन सागर के किसी संकीर्ण क्षेत्र पर बाँध का निर्माण करके किया जाता है। बाँध के द्वार पर स्थापित टरबाइन ज्वारीय ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में रूपांतरित कर देती है।

तरंग ऊर्जा : समुद्र तट के निकट विशाल तरंगों की गतिज ऊर्जा को भी विद्युत उत्पन्न करने के लिए इसी ढंग से ट्रेप किया जा सकता है। महासागरों के पृष्ठ पर आर-पार बहने वाली प्रबल पवन तरंगें उत्पन्न करती है। तरंग ऊर्जा का वहीं पर व्यावहारिक उपयोग हो सकता है जहाँ तरंगें अत्यंत प्रबल हों। तरंग ऊर्जा को ट्रेप करने के लिए विविध युक्तियाँ विकसित की गई हैं ताकि टरबाइन को घुमाकर विद्युत उत्पन्न करने के लिए इनका प्रयोग किया जा सके।

महासागरीय तापीय ऊर्जा : समुद्रों अथवा महासागरों के पृष्ठ का जल सूर्य द्वारा तप्त हो जाता है जबकि इनके गहराई वाले भाग का जल अपेक्षाकृत ठंडा होता है। ताप में इस अंतर का उपयोग सागरीय तापीय ऊर्जा रूपांतरण विद्युत संयत्र (Ocean Thermal Energy Conversion Plant या OTEC विद्युत संयंत्र) में ऊर्जा प्राप्त करने के लिए किया जाता है। OTEC विद्युत संयंत्र केवल तभी प्रचलित होते हैं जब महासागर के पृष्ठ पर जल का ताप तथा 2 km तक की गहराई पर जल के ताप में 20°C का अंतर हो। पृष्ठ के तप्त जल का उपयोग अमोनिया जैसे वाष्पशील द्रवों को उबालने में किया जाता है। इस प्रकार बनी द्रवों की वाष्प फिर जनित्र के टरबाइन को घुमाती है। महासागर की गहराइयों से ठंडे जल को पंपों से खींचकर वाष्प को ठंडा करके फिर से द्रव में संघनित किया जाता है।


Q6. सौर भट्टी किसे कहते हैं ? इसकी बनावट तथा लाभ लिखिए।

उत्तर ⇒ जिस भट्टी को सौर ऊर्जा से गर्म किया जाता है उसे सौर भट्टी कहते हैं।

बनावट : सौर भट्टी में छोटे-छोटे हजारों दर्पणों का प्रयोग किया जाता है। उन्हें इस प्रकार लगाया जाता है कि एक बहुत बड़ा अवतल परावर्तक तैयार हो जाए। इसके फोकस पर एक भट्टी रख दी जाती है। सूर्य की किरणें दर्पण से परावर्तित होकर फोकस बिंदु पर मिल जाती हैं जिस कारण परावर्तन के पश्चात् भट्टी का तापमान बहुत अधिक बढ़ जाता है। यह तापमान इतना अधिक बढ़ाया जा सकता है कि इससे लोह जैसी धातु भी पिघल जाए।

लाभ:
I. धातुओं को पिघला कर विभिन्न वस्तुएँ तैयार की जा सकती हैं।

II. धातुओं को काटा और जोड़ा जा सकता है।


ऊर्जा के स्रोत वर्ग हिंदी में 10 नोट पीडीएफ

Q7. हमारी सुविधा के लिए पवनों तथा जल ऊर्जा के पारंपरिक उपयोग में किस प्रकार के सुधार किए गए हैं ?

उत्तर ⇒ जल और पवन ऊर्जा के परंपरागत स्रोत हैं। शुरू में इनकी ऊर्जा का प्रयोग बहुत सीमित था, परन्तु तकनीकी विकास के कारण ये एक मुख्य ऊर्जा स्रोत की तरह विकसित हो रहे हैं। इस क्रम में अग्रलिखित सुधार किए गए हैं-

I. पवन ऊर्जा एक प्रदूषण मुक्त ऊर्जा स्रोत है। पवन चक्की द्वारा पवन की गतिज ऊर्जा का उपयोग यांत्रिक कार्य जैसे कुएँ से जल निकालना और विद्युत जनित्र चलाकर इसे विद्युत ऊर्जा में बदलकर विभिन्न प्रकार से उपयोग किया जा रहा है।

II. बहते जल का उपयोग सामान्यतः यातायात के लिए किया जाता था, परन्तु अब बाँध बनाकर इस ऊर्जा को जल विद्युत ऊर्जा में बदलकर विभिन्न प्रकार से उपयोग किया जा रहा है। उपर्युक्त सम्बन्ध में नई तकनीक के प्रयोग द्वारा उच्च दक्षता की मशीनें बनाकर अधिक मात्रा में ऊर्जा का दोहन सुलभ हो गया है।


Q8. नाभिकीय संलयन और नाभिकीय विखंडन अभिक्रियाओं में अंतर स्पष्ट कीजिए ?

उत्तर ⇒ नाभिकीय संलयन और नाभिकीय विखंडन अभिक्रियाओं में अंतन निम्नलिखित हैं –

नाभिकीय संलयनः

I. इसमें दो हल्के नाभिक परस्पर संलयित होकर एक भारी नाभिक का निर्माण करते हैं।
II.नाभिकीय संलयन अत्यधिक ताप (लगभग 4×106⁶C) पर सम्पन्न होती है।
III. यह अभिक्रिया प्रोटॉन द्वारा प्रेरित होती है।
IV. यहशृंखला अभिक्रिया नहीं है।
V. इस अभिक्रिया में भाग लेने वाले कण का वेग अति उच्च होता है।

नाभिकीय विखंडन:

I. इसमें एक भारी नाभिक टूटकर दो हल्के नाभिकों में परिवर्तित हो जाते हैं।
II. यह अभिक्रिया ताप से स्वतंत्र होती है।
III. यह अभिक्रिया न्यूट्रॉन द्वारा प्रेरित होती है।
IV. यह एकश्रृंखला अभिक्रिया है।
v. यह अभिक्रिया मंद वेग वाले न्यूट्रॉन द्वारा कराया जाता है।


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Q9. चित्र की सहायता से बॉक्सनुमा सौर कूकर की संरचना एवं कार्य विधि का वर्णन कीजिए ?

उत्तर ⇒ संरचना या बनावट : इसमें लकड़ी का एक आयताकार बॉक्स होता है जिसमें एक धातु का बॉक्स होता है, जो काले रंग से पेंट किया होता है। दोनों बक्सों के बीच में थर्मोकॉल जैसे कुचालक पदार्थ भरे होते हैं। धातु वाले बॉक्स को मोटे काँच के सीट के ढक्कन से ढक दिया जाता है। एक समतल दर्पण परावर्तक वाले बॉक्स से जुड़ा होता है। बॉक्स के अंदर जिस बर्तन में खाद्य सामग्री रखना है उसकी पेंदी एवं दीवार काले रंग का होता है।

कार्य विधि : सौर कूकर को धूप में इस प्रकार रखा जाता है कि सूर्य की किरणे काँच की प्लेट एवं परावर्तक सतह (समतल दर्पण) पर पड़े।
सूर्य की किरणें काँच के प्लेट से होती हुई बॉक्स के अवशोषक सतह एवं बर्तन पर पड़ती है। इससे भीतर ऊष्मा संचित होने लगती है। कुछ क्षण बाद काली सतहें अवरक्त किरणें उत्सर्जित करती है। काँच का प्लेट ऊष्मा को बाहर निकलने से रोकती है। दो-तीन घंटे में इसका ताप 100°C से 140°C तक पहुँच जाता है और कूकर में रखे खाद्य सामग्री पक कर तैयार हो जाता है।


Q10. नाभिकीय ऊर्जा का क्या महत्त्व है ?

उत्तर ⇒ नाभिकीय ऊर्जा भारी नाभिकीय परमाणु (यूरेनियम, प्लूटोनियम, थोरियम) के नाभिक पर निम्न ऊर्जा न्यूट्रॉन से बमबारी करके हल्के नाभिकों में तोड़ा जा सकता है जिससे विशाल मात्रा में ऊर्जा मुक्त होती है। यूरेनियम के एक परमाणु के विखंडन से जो ऊर्जा मुक्त होती है वह कोयले के किसी कार्बन परमाणु के दहन से उत्पन्न ऊर्जा की तुलना में एक करोड़ गुना अधिक होती है। अतः नाभिकीय विखंडन से अपार ऊर्जा प्राप्त की जा सकती है। अनेक विकसित और विकासशील देश नाभिकीय ऊर्जा से विद्युत ऊर्जा का रूपांतरण
कर रहे हैं।

इससे निम्नलिखित लाभ प्राप्त होते हैं –

I. अधिक ऊर्जा की प्राप्ति के लिए कम ईधन की आवश्यकता पड़ती है।
II. यह ऊर्जा का विश्वसनीय स्रोत है।
III. अन्य स्रोतों की अपेक्षा कम खर्च पर ऊर्जा प्रदान करता है।


Class 10th Science (Physics) Subjective Question 2023 ( दीर्घ उत्तरीय प्रश्न ) 

S.N  SCIENCE ( विज्ञान ) SUBJECTIVE
S.N Class 10th Physics (भौतिक दीर्घ उत्तरीय प्रश्न
1. प्रकाश के परावर्तन तथा अपवर्तन
2. मानव नेत्र तथा रंगबिरंगा संसार
3. विधुत धारा
4. विधुत धारा के चुंबकीय प्रभाव
5. ऊर्जा के स्रोत

Class 10th Science (Physics) Subjective Question 2023 ( लघु उत्तरीय प्रश्न ) 

भौतिक विज्ञान ( PHYSICS ) लघु उत्तरीय प्रश्न
1. प्रकाश के परावर्तन तथा अपवर्तन
2. मानव नेत्र तथा रंगबिरंगा संसार
3. विधुत धारा
4. विधुत धारा के चुंबकीय प्रभाव
5.  ऊर्जा के स्रोत
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